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महाकुंभ में क्यों नहीं गए राहुल-प्रियंका

प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हुए। बीजेपी के दिग्गज नेताओं, जैसे प्रधानमंत्री मोदी, योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, राजनाथ सिंह, और जेपी नड्डा ने भी डुबकी लगाई। Why did Rahul-Priyanka not go to Maha Kumbh

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सभी नेताओं ने योगी सरकार को महाकुंभ के इंतजामों के लिए बधाई दी। आयोजन के दौरान सवाल उठे कि विपक्षी नेता हिंदुओं के इस बड़े समागम में क्यों शामिल नहीं हुए। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने महाकुंभ से दूरी बनाए रखी, जिससे यह धारणा बनी कि इससे हिंदुत्व की राजनीति मजबूत होगी और बीजेपी को फायदा होगा। अब सवाल ये है कि क्या विपक्ष ने महाकुंभ में न जाकर खुद के लिए राजनीति में नुकसान किया?

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भगदड़ को लेकर हमलावर रहा विपक्षविपक्ष के बड़े नेताओं ने महाकुंभ में जाने से तो परहेज किया लेकिन प्रयागराज और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ को लेकर ये सभी नेता एकजुट हो गए और उन्होंने मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर जोरदार हमले किए।

महाकुंभ के दौरान विपक्षी नेताओं के विवादित बयानों पर काफी हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर महाकुंभ में बदइंतजामी का आरोप लगाया और इस आयोजन को ‘मृत्यु कुंभ’ करार दिया। उनके बयान से विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद ममता ने सफाई दी और कहा कि उनकी टिप्पणी आयोजन में हुई कमियों को लेकर थी। इस बयान के कारण राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई।

लालू प्रसाद यादव ने महाकुंभ को ‘फालतू’ बताया। इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गंगा में डुबकी लगाने को गरीबी मिटाने से जोड़ा, जिससे बीजेपी ने उन पर हमला बोला। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भागलपुर जनसभा में बिना नाम लिए लालू पर निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर से चिढ़ने वाले अब महाकुंभ को कोस रहे हैं।

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    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महाकुंभ पर नपी-तुली राय दी। उन्होंने कहा, “मैं किसी की आस्था पर सवाल नहीं उठाता। जैसे मैंने उमराह किया, वैसे ही अगर किसी की आस्था महाकुंभ में स्नान करना कहती है, तो हमें इसमें दखल नहीं देना चाहिए। हमें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे बीजेपी हमें हिंदुओं के खिलाफ साबित कर सके।”

    कांग्रेस के कई नेताओं ने महाकुंभ में डुबकी लगाई, जिनमें हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, सचिन पायलट, दिग्विजय सिंह और अन्य शामिल थे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रयागराज में स्नान किया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि धर्म और आध्यात्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है, और उन्होंने पिछले साल राम मंदिर के निर्माण के दौरान भी यही रुख अपनाया था। उनका मानना है कि किसी के धार्मिक कर्मों में दखल देने का कोई मतलब नहीं।

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