
उदयपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराणा भूपाल चिकित्सालय स्थित जनाना चिकित्सालय (पन्नाधाय महिला चिकित्सालय) में हुए करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार की अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जांच की जाएगी। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने इस संबंध में एसीबी के महानिदेशक को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।PANADHAYA Janana MB Hospital investigation by ACB
जनाना चिकित्सालय का भवन करीब 50 से 60 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। भूतल और प्रथम तल लंबे समय से उपयोग में थे और समय के साथ भवन की हालत जर्जर होती चली गई। इसके बावजूद प्रसूताओं की संख्या में बढ़ोतरी और स्थान की कमी का हवाला देकर इसी कमजोर और अनुपयोगी भवन पर एक अतिरिक्त फ्लोर का निर्माण कराने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय ने न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया, बल्कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों की जान को भी गंभीर खतरे में डाल दिया।
एमबी अस्पताल और सार्वजनिक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को भवन की खराब स्थिति की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद बिना समुचित तकनीकी मूल्यांकन के उसी भवन पर एक और फ्लोर बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए। अधिकारियों की सिफारिशों पर सरकार ने करोड़ों रुपये स्वीकृत कर दिए और निर्माण कार्य पूरा भी कर लिया गया। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद भवन में दरारें आने लगीं और वह बैठने लगा। संभावित जनहानि को देखते हुए प्रशासन को आनन-फानन में पूरा भवन खाली कराना पड़ा और प्रसूताओं को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया गया।
मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग ने आईआईटी रूड़की की विशेषज्ञ टीम से भवन की जांच करवाई। आईआईटी रूड़की की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में है और इसे तत्काल गिराया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भवन पर बनाया गया अतिरिक्त फ्लोर तकनीकी दृष्टि से गलत और असुरक्षित है। एक अन्य विभागीय जांच में भी यह निष्कर्ष निकला कि भवन लगभग 60 वर्ष पुराना है और इसके स्थान पर नया भवन बनाया जाना चाहिए था।

इतने गंभीर खुलासों के बावजूद लंबे समय तक किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इस पर उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन ने सरकार को करोड़ों रुपये के नुकसान और जनता की जान जोखिम में डालने का मुद्दा विधानसभा में उठाया। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा विधायक ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों को लगातार पत्र लिखकर प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
लगातार दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सरकार ने जांच के आदेश जारी किए हैं। एसीबी द्वारा एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच की जाएगी। विधायक ताराचंद जैन का कहना है कि अनुपयोगी और जर्जर भवन पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाले अधिकारियों के खिलाफ यदि सख्त कार्रवाई होती है, तो यह भविष्य में अन्य अधिकारियों के लिए भी एक सख्त चेतावनी और सबक साबित होगा।






