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नागा साधु जो निकल गए मुसलमानो से लड़ने

1669 में मुगल सम्राट औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर हमला किया, जिससे एक ऐतिहासिक संघर्ष का आरंभ हुआ। इस हमले के दौरान, लगभग 40,000 नागा साधुओं ने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। पहले हमले में, 664 में, नागा साधुओं ने औरंगजेब के प्रयास को विफल कर दिया था, लेकिन दूसरे हमले में वह सफल हो गए। औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और उसकी जगह ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया। यह घटना भारतीय इतिहास में धार्मिक संघर्ष और सम्राट की आस्थाओं का प्रतीक बन गई। नागा साधुओं की वीरता और बलिदान ने धार्मिक गौरव की एक नई मिसाल कायम की। Naga Sadhu who went out to fight Muslims

नागा साधु हमेशा ही आम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। खासकर महाकुंभ मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में उनकी उपस्थिति बेहद आकर्षक होती है। नागा साधु अक्सर समाज से दूर, एकांत में रहते हैं और बहुत कम ही सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं। कुंभ मेला उन दुर्लभ अवसरों में से एक है, जहां आम लोग इन साधुओं को देख सकते हैं। इस दौरान, वे अपने शरीर पर आभूषणों, गहनों, त्रिशूल, डमरू और रुद्राक्ष की माला पहने हुए नजर आते हैं। उनका यह रूप और जीवनशैली हर किसी के लिए एक रहस्य की तरह होती है, जो उन्हें और भी आकर्षक बना देता है। कुंभ मेला में नागा साधुओं का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं, क्योंकि यह उनके लिए एक दिव्य अनुभव होता है।

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