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मनमोहन सिंह वो फैसला नहीं लेते तो अभी भारत कहा होता

(CHITTORGARHNEWS.ORG) मनमोहन सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए। आज, लगभग 92 वर्ष की आयु में, वे हम सभी को छोड़कर चले गए। उन्हें भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। वह निर्णय आज भारत के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह साबित हो रहे हैं, जो देश की विकास यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री पद को संभालने वाले पहले सिख थे। वे मृदुभाषी और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। मनमोहन सिंह ने भारतीय रिज़र्व बैंक (केंद्रीय बैंक) का नेतृत्व किया और वित्त सचिव तथा मंत्री के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने संसद के ऊपरी सदन में विपक्ष का नेतृत्व भी किया। उनके द्वारा लिए गए निर्णयों का प्रभाव लगभग 1 अरब लोगों के जीवन पर पड़ा, जिनसे भारत की दिशा और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आए।

1. आर्थिक उदारीकरण
१९९१ में जब मनमोहन सिंह को भारत का वित्त मंत्री बनाया गया, तब देश की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक थी। भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था और उसके पास केवल २-३ सप्ताह का आयात करने लायक विदेशी मुद्रा भंडार था। ऐसी कठिन परिस्थितियों में, मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण की नीति को अपनाया, जिसे उनकी पार्टी और विपक्ष दोनों ने काफी विरोध किया। बावजूद इसके, उन्होंने साहसिक कदम उठाए और निजीकरण को बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय मुद्रा के पतन को रोका जा सका। उनके इन फैसलों ने न केवल देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर किया, बल्कि उन्हें इसके बाद कोई नहीं रोक पाया। इसके साथ ही, उन्होंने गरीबी उन्मूलन के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की।
अनिच्छुक प्रधान मंत्री (RELUTANT PM)

2004 के आम चुनाव में जब कांग्रेस को भारी बहुमत मिला, तब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया। हालांकि, उन्होंने पहले इस पद के लिए अपनी अनिच्छा व्यक्त की थी, लेकिन बहुत जल्द ही उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपनी भूमिका को समझ लिया और उसे पूरी निष्ठा से निभाया। उनके पहले कार्यकाल (2004-2009) में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय गति पकड़ी। इस दौरान, देश की जीडीपी लगभग 8% बढ़ी, और भारत प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में दूसरी सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाला देश बन गया। मनमोहन सिंह ने कई साहसिक फैसले लिए, जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ हुआ। उन्होंने विदेशी निवेशकों को भारत में आकर्षित करने के लिए नीतियाँ बनाई, जो देश की विकास दर को बढ़ाने में मददगार साबित हुईं। इसके अलावा, उन्होंने 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के समय भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए, जिनकी वजह से भारत अन्य देशों के मुकाबले संकट से अधिक प्रभावित नहीं हुआ।

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