“जमराबीज” मेनार में एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला दिन है। यह दिन विशेष रूप से मेनारिया ब्राह्मणों द्वारा मनाया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण युद्ध और विजय के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है। यह घटना विक्रम संवत 1657 (सन् 1600) में हुई, जब होली के दूसरे दिन, यानी जमराबीज पर, मेनारिया ब्राह्मणों ने मुगलों की एक क्रूर चौकी को समाप्त करने के लिए साहसिक कदम उठाया।
मेनार गांव में मुगलों की चौकी स्थापित थी, जिसका सूबेदार ग्रामीणों को परेशान करता था। इस स्थिति से तंग आकर, मेनारिया ब्राह्मणों ने एकजुट होकर मुगलों पर हमला किया और उनकी सेना को नष्ट कर दिया। इस वीरता से प्रभावित होकर महाराणा अमर सिंह ने मेनारिया समाज को विशेष सम्मान प्रदान किया। उन्होंने उन्हें लाल जाजम, रणबांकुरा ढोल, सिर पर कलंकी पहनने की मान्यता दी और मेवाड़ की 17वीं उमराव की उपाधि दी jamrabeej special for brahman

इस प्रकार, जमराबीज का दिन मेनारिया समाज के लिए शौर्य और विजय का प्रतीक बन गया और इसे हर साल इस घटना की याद में मनाया जाता है। यह दिन मेनार और मेवाड़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में प्रसिद्ध है, जो साहस और संघर्ष की प्रेरणा देता है।की मान्यता दी और मेवाड़ की 17वीं उमराव की उपाधि दी jamrabeej special for brahman







