Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

‘जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा’ (Dont touch feet: warning)

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक का हाल ही में दिया गया बयान, “जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा” (Dont touch feet), भारतीय राजनीति और समाज में चर्चा का केंद्र बन गया है। यह बयान उन्होंने जब सार्वजनिक रूप से दिया, तो सोशल मीडिया और मीडिया में तूफान सा मच गया। इस बयान को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक का यह बयान न केवल राजनीति में बल्कि समाज में भी गहरी छाप छोड़ रहा है। इस लेख में हम इस बयान के संदर्भ, राजनीतिक असर, और समाज पर इसके प्रभाव पर चर्चा करेंगे।

वीरेंद्र खटीक का बयान और संदर्भ

वीरेंद्र खटीक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री, जिन्होंने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा में यह बयान दिया कि “जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा” (do not touch feet), अब चर्चा का विषय बन गए हैं। यह बयान मध्य प्रदेश के टिकमगढ़ जिले में दिया गया था। खटीक ने यह टिप्पणी सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के संदर्भ में की, जहां लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अक्सर अधिकारियों से पैर छूने तक की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

उनका इशारा था कि जो लोग केवल नेताओं या अधिकारियों के पैरों में गिरकर काम की उम्मीद रखते हैं, उनका काम सही तरीके से नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें केवल मेहनत और ईमानदारी से काम करने वालों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। उनके इस बयान ने सरकार के भीतर एक नई बहस को जन्म दिया है, क्योंकि यह बयान सीधे तौर पर उन लोगों को चुनौती देता है, जो पद और सत्ता का फायदा उठाने के लिए अधिकारियों के सामने झुकते हैं।

यह बयान यह भी दिखाता है कि भारतीय राजनीति में सत्ता में बैठे लोग अब पारंपरिक ‘पैरों में गिरने (feet touch)’ की प्रथा को चुनौती दे रहे हैं। खटीक ने यह स्पष्ट किया कि अब केवल कर्म और काम के आधार पर ही लोगों को सम्मान मिलेगा, न कि केवल उनके झुके हुए सिर के आधार पर। यह बयान एक तरह से भारतीय समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और भेदभाव के खिलाफ एक बयान के रूप में देखा जा सकता है।

बयान के बाद की प्रतिक्रियाएं

वीरेंद्र खटीक के बयान के बाद सोशल मीडिया और मीडिया में प्रतिक्रियाओं का तांता लग गया। कुछ लोगों ने उनका समर्थन किया और इसे भारतीय समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और भेदभाव के खिलाफ एक मजबूत कदम माना। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बयान को राजनीति का हिस्सा मानते हुए इसे विडंबना करार दिया। उनका कहना है कि खटीक जैसे नेता खुद भी सत्ता की राजनीति में संलिप्त होते हैं, और इस प्रकार के बयान केवल समाज में भेदभाव को बढ़ावा देने वाले हो सकते हैं।

बीजेपी के भीतर भी इस बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ नेताओं ने इसे सकारात्मक रूप में देखा और खटीक को ईमानदारी से काम करने वाले नेताओं का समर्थन करने वाला बताया ।

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक का बयान, “जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा”(dont touch feet), भारतीय राजनीति और समाज में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है।

समाज में बदलाव लाने के लिए ऐसे बयान जरूरी हैं, लेकिन यह जरूरी है कि उनका उद्देश्य लोगों के बीच समानता और न्याय को बढ़ावा देना हो, न कि समाज को और ज्यादा बांटना। वीरेंद्र खटीक का यह बयान हमें यह सिखाता है कि केवल मेहनत और ईमानदारी से ही समाज में बदलाव लाया जा सकता है। खटीक का यह बयान समाज में समता और ईमानदारी की ओर एक कदम बढ़ने का प्रतीक बन सकता है, लेकिन इसके सामाजिक और राजनीतिक असर को समझना और उस पर विचार करना भी आवश्यक है।

Leave a Comment