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बिलोदा में मोर मारने वालों को पकड़ा: रात की ठंड में युवाओं की बहादुरी

बिलोदा,गाँव, जहां के लोग अपने वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर बेहद सजग और जागरूक हैं। रात को यह जानकारी मिली कि कुछ लोग मोर मारने की कोशिश कर रहे हैं,गांव के नौजवान बिना वक्त गवाए अपनी रणनीति तैयार की। उनकी योजना थी शिकारियों को पकड़ना और उनकी अवैध गतिविधियों को रोका जाए। (Peacock killers caught in Biloda)

ठंड की रात है, जब बिलोदा गांव में कुछ शिकारियों की हलचल देखि जो मोर मारने का प्रयास कर रहे थे। मोर, जो भारतीय वन्यजीवों का एक अहम हिस्सा हैं, उनकी हत्या करना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन भी है ।

गांव के नौजवानों ने इस घटना को होते देखा और तुरन्त कार्रवाई की। इन युवाओं ने पहले शिकारियों को पकड़ने के लिए अपने इलाके में खोजबीन शुरू की, और कुछ ही समय में शिकारियों को घेर लिया। हालांकि, यह काम आसान नहीं था क्योंकि रात का समय था और ठंड बहुत थी, लेकिन इन नौजवानों ने हार नहीं मानी और अंततः शिकारियों को पकड़ने में सफल रहे।(Peacock killers caught in Biloda)

    इस दौरान, बिलोदा का एक नौजवान घायल भी हो गया, जब वह शिकारियों के साथ संघर्ष कर रहा था। इन युवाओं के प्रयासों से शिकारियों को पकड़ने के बाद, पुलिस को सूचित किया गया और शिकारियों को डूंगला पुलिस स्टेशन सौंप दिया गया।

    इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि गांव के लोग अपनी प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए जागरूक और जिम्मेदार हैं। उन्होंने न केवल अपनी सूझबूझ से अपराधियों को पकड़ा, बल्कि एकजुट होकर यह भी साबित किया कि यदि समाज एकजुट हो, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।

    भारत में मोर (Peafowl) को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित पक्षी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसका मतलब यह है कि मोर का शिकार करना, या उसे नुकसान पहुँचाना कानूनन अपराध है। मोर के शिकार पर सजा का प्रावधान सख्त है, और इस तरह के अपराध करने पर अपराधी को कड़ी सजा हो सकती है।

    मोर मारने पर सजा:

    जुर्माना और कारावास: भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत, मोर का शिकार करने पर 3 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। जुर्माने की राशि अधिकतम ₹25,000 तक हो सकती है।

    अन्य कानूनी कार्रवाई: शिकार के दौरान अगर कोई अन्य अपराध किया जाता है, जैसे कि वन्यजीवों के अवैध व्यापार में शामिल होना या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करना, तो उस पर भी अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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