Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

संविदाकर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे

(CHITORGARHNEWS.ORG) सरकारी विभागों में संविदाकर्मियों की नियमितीकरण प्रक्रिया को लेकर वित्त विभाग ने एक महत्वपूर्ण SOP (Standard Operating Procedure) जारी किया था। इस SOP के तहत, संविदाकर्मियों को नियमित करने और उन्हें नियुक्ति पत्र देने की एक समय सीमा निर्धारित की गई थी, जो आज, 27 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रही है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आज तक किसी भी संविदाकर्मी को नियमित कर नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। यह स्थिति विभागों की ओर से वित्त विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को नजरअंदाज करने का नतीजा प्रतीत होती है।

SOP प्रक्रिया का महत्व और विभागों की अनदेखी
वित्त विभाग की SOP समय सीमा का उद्देश्य था कि संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए एक सुसंगत और पारदर्शी प्रक्रिया तय की जाए। हालांकि, विभागों की ओर से इस प्रक्रिया को पूरी तरह से नज़रअंदाज किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, सरकार के कई संविदाकर्मी अभी भी नियुक्ति पत्र और स्थायी पदों के लिए इंतजार कर रहे हैं। इस मुद्दे पर विभागों का उदासीन रवैया सवालों के घेरे में है, क्योंकि ऐसे कर्मियों के लिए यह उम्मीद की जाती है कि उन्हें स्थायी नियुक्ति दी जाएगी, जो उनकी मेहनत और योगदान का उचित सम्मान है।

ठेका प्रथा और RLSDC बोर्ड की जरूरत
सिर्फ नियमितीकरण की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि ठेका कर्मचारियों की स्थिति भी एक बड़ा मुद्दा है। सरकार और विभागों ने अभी तक ठेका प्रथा को समाप्त करने और संविदाकर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए RLSDC (Rajasthan Labour Services Development Corporation) बोर्ड का गठन करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं। यह बोर्ड ठेका कर्मियों के अधिकारों की रक्षा करने, उनके कार्यस्थल की स्थितियों को बेहतर बनाने और उन्हें नियमित पदों पर स्थानांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था। इसके बावजूद, यह पहल अब तक ठंडी पड़ी हुई है, और ठेका कर्मियों को अभी भी उनके अधिकारों का इंतजार है।

सरकार के फैसलों पर रिव्यू की संभावना

सरकार के पूर्व कार्यकाल में लिए गए कई फैसलों पर अब समीक्षा होने की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से, कैबिनेट बैठक में यह मुद्दा उठ सकता है कि पिछले छह महीनों में किए गए फैसलों की समीक्षा की जाए। इस समीक्षा से यह उम्मीद जताई जा रही है कि संविदाकर्मियों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार कुछ ठोस कदम उठा सकती है, और उन्हें नियमितीकरण की प्रक्रिया के तहत स्थायी नौकरी दी जा सकती है
संविदाकर्मियों के लिए नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र की प्रक्रिया में देरी केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि इन कर्मियों के अधिकारों के प्रति उदासीनता का प्रतीक है। अब यह जरूरी हो गया है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि कर्मचारियों को उनका हक मिले और ठेका प्रथा समाप्त हो सके। सरकार को वित्त विभाग द्वारा निर्धारित SOP टाइमलाइन को सख्ती से लागू करना चाहिए, ताकि संविदाकर्मी स्थायी नौकरी पा सकें और उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

Leave a Comment