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क्यों भैंसें ज्यादा फैट वाला दूध देती हैं?

(Chittorgarhnews.org)नए पशुपालक जब भैंस खरीदने का निर्णय लेते हैं, तो वे अक्सर ऐसी नस्ल का चयन करते हैं जो अधिकतम दूध देने में सक्षम हो। इसके साथ ही, वे दूध की मात्रा के अलावा इसमें फैट की मात्रा को भी अहम मानते हैं।

अधिकांश नए पशुपालक जब भैंस खरीदते हैं, तो वे ऐसी नस्ल का चयन करते हैं जो ज्यादा दूध देती है । अगर आप व्यापार के उद्देश्य से भैंस खरीद रहे हैं, तो दूध देने की क्षमता के अलावा दूध में फैट की मात्रा कितनी है। गौरतलब है कि सबसे अधिक फैट वाला दूध भदावरी नस्ल की भैंस (Bhadavari Buffalo) देती है। इस नस्ल के दूध में कम से कम 11 प्रतिशत फैट होता है, जो 15 प्रतिशत तक भी जा सकता है, जो अन्य नस्लों की तुलना में कहीं अधिक है।

दूध में फैट का मतलब वसा होता है। दूध में जितना ज्यादा वसा (फैट) होगा, उसका गाढ़ापन उतना ही अधिक होगा। यह बात गांवों में रहने वाले लोग अच्छे से समझते हैं, क्योंकि दूध व्यापारियों द्वारा मिलावट की पहचान अक्सर दूध के गाढ़ेपन से ही की जाती है। सरल शब्दों में कहें तो, दूध में जितना अधिक फैट होगा, उतना ही ज्यादा मक्खन निकलेगा। अधिक घी उत्पादन के लिए ही ये भैंसें पाली जाती हैं।

अगर भदावरी नस्ल की भैंस खरीदने का फैसला किया है, तो उसकी कीमत और देखभाल के तरीके को भी जानना जरूरी है। इन भैंसों के लिए ऐसा शेड बनवाना चाहिए, जिसमें हवा और रोशनी दोनों सही तरीके से आए। शेड की सफाई का ध्यान रखें और यह सुनिश्चित करें कि गोबर या गंदा पानी अधिक समय तक न जमा हो। खाने-पीने की बात करें तो इनको सूखा और हरा चारा दोनों देना चाहिए। रोजाना कम से कम दो किलो बाजरा, गेहूं, मक्का या चावल को चूनी या चोकर के रूप में देना चाहिए। साथ ही, सरसों, अलसी या मूंगफली की खली भी देना आवश्यक है। भदावरी नस्ल की भैंस की कीमत 50 हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तक हो सकती है।

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