शहर के पास स्थित गामड़ा पाल गांव में होलिका दहन का कार्यक्रम रात के बजाय दिन में होता है, जो एक अनोखी परंपरा बन चुकी है। यह परंपरा वर्षों पहले गांव में हुई अप्रिय घटनाओं के बाद शुरू की गई थी। अब हर साल, होलिका दहन के दिन करीब 10 से 12 गांवों के आदिवासी समुदाय के हजारों लोग इस आयोजन में भाग लेते हैं। इस मौके पर लोग अपने पारंपरिक गीतों के साथ उत्साह से नृत्य करते हैं। यह दिन गांव में एक खास उल्लास और समृद्ध सांस्कृतिक माहौल लाता है, जो न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता को भी प्रगाढ़ करता है।Salumber: Why do we celebrate Gamda Pal’s Holi during the day








