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समर्थन मूल्य पर फसलों को नहीं खरीदने से किसानों में रोष

सरकार एक और किसानों का भला करने के लिए कहती है | और दूसरी ओर किसानों का ही शोषण हो रहा है ऐसा किसान प्रतिनिधि ने हमें बताया किसानों को अभी,पैसों की बहुत ही आवश्यकता रहती है एक तरफ खरीफ की फसल को घर पर लाना दूसरी तरफ रवि की फसल बुवाई की पूरी तरह तैयारी करना दो तरह का काम एक साथ आने से पैसों की अत्यंत आवश्यकता होती है| तो ऐसा सरकार ने MSP मूल्य पर खरीदने के लिए कुछ फिक्स कर रखा है लेकिन ना तो मंदी चल रही है |ना ही कहीं पर तोल कांटा लगा रखा है| किसान बेचारा अपना माल कहां बेचेगा सही रेट में आपको बता दें अभी जो मार्केट में किसानों का माल लिया जा रहा है |वह बहुत ही कम पैसों में लिया जा रहा है जैसे अपन बात करें सरकार ने समर्थन मूल्य कर रखा है तो अगर मूंगफली का समर्थन मूल्य लगभग 6783 रुपए हैं सोयाबीन का समर्थन मूल्य जो की लगभग ₹5000 हैं वहीं जवाहर का मूल्य ₹3400 है| इस तरह से फसलों का सरकार ने समर्थन मूल्य अच्छा निर्धारित कर रखा है लेकिन उसे अच्छे निर्धारित मूल्य पर किसान अपने माल कहा पर बेचे इसके लिए सरकार को भी आगे के तुरंत से तुरंत समर्थन मूल्य पर फसलों और जिंसों की खरीदारी शुरू करना चाहिए जिससे कि किसानों को अपनी फसल का वाजिब दाम मिल सके इस किसान नेता ने यही सरकार से रिक्वेस्ट करने चाहिए कि बस तुरंत ही समर्थन मूल्य पर हमारे फैसल खरीदी जाए जिससे कि हमें हमारा हक का पैसा मिल जाए|